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Wed, Apr 29, 2026 | New Delhi
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Low Income and Savings: पिछले 10 सालों में काफी ज्यादा घट चुकी है लोगों की आमदनी और बचत, बढ़ रहे है लोन, जानिए डीटेल्स

July 3, 2024 Sneha 1 min read
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घट रही है आमदनी और बचत बढ़ रहे लोन और कर्ज

आपको बतादें, कि हाल ही में तौर पर भारत के लोगों की आमदनी, बचत और लोन लेने की आदत को लेकर के कुछ आकड़े सामने आए है. जिसमें कि ये साफ दिखाई दे रहा है, कि किस प्रकार से पिछले 10 सालों में भारतीय लोगों की आमदनी और बचत में कमी आई है. जबकि खर्च करने और लोन लेने की आदत में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण महंगाई, बेरोजगारी और बदलती जीवनशैली. जहां पर महंगाई तो बढ़ ही रही है, परंतु इसके साथ ही में बढ़ रहे है, लोगों के खर्चें. जिससे के आमदनी में गिरावट देखने को मिल रही है.

क्यों हो रही है आमदनी और बचत में कमी

महंगाई पिछले दशक में महंगाई दर में काफी वृद्धि देखनें को मिली है. जिससे लोगों की आमदनी पर इसका काफी ज्यादा असर देखनें को मिला है. बेरोजगारी दर में भी इजाफा देखनें को मिला है, जिससे लोगों की नियमित आमदनी पर असर पड़ा है. स्थिर वेतन कई क्षेत्रों में वेतन वृद्धि स्थिर रही है, जिससे कि लोगों की बचत कम हुई है.

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खर्च और लोन लेने की आदत में बढ़ोतरी

Changing Lifestyle: बदलते हुए लाइफस्टाइल के कारण लोग अधिक खर्च करने लगे हैं. फैशन, गैजेट्स और बहुत सी अलग चीजों पर खर्चें काफी ज्यादा बढ़ चुके है.

Loan Availability: आसानी से मिल रहा है लोन. बैंक और वित्तीय संस्थान अब आसानी से लोन प्रोवाइड कर रहे हैं. जिस वजह से लोग ज्यादा कमाने की बजाय लोन लेने पर ज्यादा ध्यान देते है.

EMI Culture: वहीं लोग अब ज्यादातर चीजों को ईएमआई पर खरीद लेते है. जिससे लोगों की कर्ज लेने की आदत में भी इजाफा देखनें को मिल रहा है.

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जानिए क्या कहती है RBI की रिपोर्ट

GDP और RBI रिपोर्ट: ग्रोथ रेट में गिरावट पिछले कुछ वर्षों में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट में गिरावट आई है। हालांकि सरकार ने कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं. फिर भी आर्थिक गिरावट का प्रभाव देखा जा सकता है.

RBI रिपोर्ट: Reserve Bank of India RBI की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीयों का सेविंग दर अब घटकर 30% से भी कम हो गया है. वहीं, घरेलू कर्ज का स्तर 50% से भी ज्यादा हो चला है.

विदेशी निवेश में गिरावट: निवेश में कमी GDP जीडीपी में गिरावट के कारण विदेशी निवेश में भी कमी आई है, जो आर्थिक वृद्धि पर असर डाल रहा है.

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