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नई दिल्ली: भाजपा ने बुधवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर अपनी टिप्पणी के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा और उनसे कानून के बारे में झूठ बोलना बंद करने के लिए कहा.

इससे पहले दिन में केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए गरीब अप्रवासियों को घर और नौकरियां देकर भारत में बसाना चाहती है. इसके जवाब में बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि किसी की भी नौकरी या नागरिकता नहीं जाएगी और केजरीवाल पर जमकर बरसे.

उन्होंने कहा ये कैसा तर्क दे रहे हैं अरविंद केजरीवाल? ये कौन लोग हैं जो भारत आए हैं? ये वही लोग हैं जिन पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों में अत्याचार किया गया. क्या उनका पुनर्वास करना हमारा नैतिक कर्तव्य नहीं है? अरविंद केजरीवाल किस हद तक जाएंगे? प्रसाद ने कहा, सीएए नागरिकता देने के लिए है और यह किसी की नौकरी या नागरिकता नहीं छीनेगा. गृह मंत्रालय के बयान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इसका भारतीय मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है. इसलिए, सीएए के बारे में झूठ बोलना बंद करें.

भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने सीएए पर केजरीवाल की टिप्पणी पर निशाना साधा और कहा कि यह उनकी घृणित मानसिकता को दर्शाता है. सीएए का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए बिना दस्तावेज वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देना है.

केजरीवाल ने CAA पर बोला हमला

केजरीवाल ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र ने सीएए नियमों की अधिसूचना के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में गरीब अल्पसंख्यकों के भारत आने के लिए दरवाजे खोल दिए हैं.

पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में 3.5 करोड़ अल्पसंख्यक हैं. भाजपा हमारे बच्चों को नौकरी नहीं दे सकती, लेकिन वे पाकिस्तान के बच्चों को नौकरी देना चाहते हैं. हमारे कई लोग बेघर हैं लेकिन बीजेपी पाकिस्तान से आए लोगों को यहां बसाना चाहती है. वे हमारी नौकरियाँ अपने बच्चों को देना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, वे पाकिस्तानियों को हमारे सही घरों में बसाना चाहते हैं. भारत सरकार का जो पैसा हमारे परिवारों और देश के विकास के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, उसका इस्तेमाल पाकिस्तानियों को बसाने में किया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव से पहले सीएए को लागू करना भाजपा की ”वोट बैंक की गंदी राजनीति” है और इस बात पर जोर दिया कि लोग चाहते हैं कि कानून रद्द किया जाए.

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