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कश्मीर में बने दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाव रेल पुल पर भारतीय रेलवे ने किया ट्रायल

June 21, 2024 Lavi Rana 1 min read
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दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल कश्मीर के रामबन जिले के संगलदान और रियासी के बीच बनाया गया है. इस ब्रिज पर भारतीय रेलवे ने ट्रेन ट्रायल लेकर इस बात की पुष्टि की है कि यह ब्रिज अब इस्तेमाल में आने के लिए तैयार है. यह ब्रिज चिनाब नदी से लगभग 359 मीटर की ऊंचाई पर बनाया है. यह भारत के साथ-साथ दुनिया में भी अभी तक का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज है और इस पर जल्द ही रेलवे की सेवाएं शुरू की जाएगी.

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ट्रेन ट्रायल रन रहा सफल

भारतीय रेलवे के द्वारा चिनाब नदी पर बसे दुनिया के सबसे ऊंचे रेल ब्रिज पर गुरुवार को ट्रायल रन किया गया और यह पूरे तरीके से सुरक्षित व सफल रहा. इस ट्रायल रन के दौरान 10 डिब्बों वाली ट्रेन का इस्तेमाल किया गया और ट्रेन को संगलदान से रियासी के रेलवे स्टेशन तक चला कर देखा गया. यह ट्रायल दोपहर को लगभग 12:00 से 2:00 तक हुआ. इस बीच ट्रेन ने दुनिया के सबसे ऊंचे पुल पर संगलधान से रियासी तक की दूरी को तय किया. और जब ट्रेन दोपहर 2:00 रियासत स्टेशन पर पहुंची तो पूरा स्टेशन ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा.

इसी महीने हो सकती है रेलवे सेवाएं शुरू

इस ट्रेन ट्रायल के दौरान ट्रेन के अंदर बहुत सारे रेलवे परियोजना में काम करने वाले कर्मचारी तथा रेलवे के अधिकारी को भी बिठाया गया था ताकि वह इसका निरीक्षण सही से कर सुरक्षा की पुष्टि कर सकें. ट्रायल रन सफलतापूर्वक होने के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि, हो सकता है ट्रेन को रियासी से कश्मीर तक जून के अंतिम सप्ताह में शुरू किया जा सकता है.

इस ब्रिज की खास विशेषताएं

यह ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेल ब्रिज है और यह चिनाब नदी से लगभग 359 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है. यह पुल पेरिस (फ्रांस) के एफिल टावर से भी 35 मीटर ऊंचा है और इसकी लंबाई 1315 मीटर है. इस ब्रिज को उधमपुर -श्रीनगर- बारामूला ट्रेन लिंक परियोजना के तहत बनाया गया है और इसे बनाने में 30,000 मेट्रिक टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है. यह ब्रिज 266 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा की गति का सामना करने की क्षमता रखता है.

ब्रिज बनाते वक्त बहुत सी परेशानीयों का किया सामना

चिनाब पर बसे इस पुल का कार्य लगभग 20 वर्ष पहले शुरू किया गया था. ब्रिज को बनाते वक्त बहुत से प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ा. रेलवे को रास्ते पहाड़ों को काटकर बनाने पड़े और उसके बाद टनल बनाए. अभी ट्रायल के दौरान सिर्फ 10 डिब्बों वाली ट्रेन को चला कर देखा गया है पर आने वाले समय में पूरी ट्रेन को चलाया जाएगा. ट्रायल के दौरान तरुण शर्मा भी इस ट्रेन में सफर कर रहे थे. रियासी से ट्रेन लगभग 20 मिनट रुके रहने के बाद निकली. यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक पल था. अब एक बार और इस ट्रेन का फाइनल ट्रायल लिया जाएगा जो की कमिश्नर के रेलवे सेफ्टी को जून के अंत में करना होगा.

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