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नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) नियमों की अधिसूचना भाजपा का एक राजनीतिक और वैचारिक बयान है क्योंकि नरेंद्र मोदी सरकार अब 2024 के लोकसभा चुनावों में दावा कर रही है कि उसने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान अपने सभी तीन बड़े वादे पूरे किए हैं.

पहला बड़ा वादा था जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना, दूसरा था अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और अब आखिरकार संसद द्वारा पारित होने के चार साल बाद सीएए को लागू करना. पहले विरोध प्रदर्शन और फिर कोविड-19 महामारी के कारण अधिनियम को लागू करने के लिए आवश्यक नियमों में चार साल से अधिक की देरी हुई.

सीएए कार्यान्वयन भारत को पड़ोसी देशों में सताए गए अल्पसंख्यकों के लिए ‘गृह देश’ होने की स्थिति में रखता है क्योंकि उनके पास कहीं और जाने के लिए नहीं है, और भाजपा की वैचारिक स्थिति को मजबूत करता है कि उपमहाद्वीप में हिंदू भारत को अपने देश के रूप में देखेंगे.

भाजपा ने पूरे किए वादे

भाजपा का कहना है हमने सभी बड़े वादों को भारतीय संविधान के प्रावधानों के तहत सख्ती से पूरा किया है. राम मंदिर को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई है. राम मंदिर फैसले या धारा 370 हटने के बाद देश में कोई तनाव नहीं हुआ. लोग ने इसकी सराहना की, वे इस बात को भी महत्व देंगे कि ये सभी वादे तभी पूरे हो सके क्योंकि पिछले दो कार्यकाल से देश में नरेंद्र मोदी की पूर्ण बहुमत की सरकार है. यह हमारे लक्ष्य ‘अबकी बार, 400 पार’ का मार्ग प्रशस्त करता है.

भाजपा का कहना है सरकार इस तथ्य पर जोर देगी कि सीएए किसी की नागरिकता नहीं छीनता है और वास्तव में, किसी भी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करता है. भाजपा नेताओं ने कहा है कि यह अल्पसंख्यकों को गुमराह करने और भड़काने के लिए सीएए के खिलाफ विपक्षी दलों का गलत प्रचार है.

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