Picsart 24 03 04 19 56 29 411 24times News

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के यवतमाल के बाभुलगांव के किसानों ने कहा है कि कीमतों में गिरावट के कारण वे पिछले साल से कपास बेचने में असमर्थ हैं. ऋण चुकाने की समय सीमा नजदीक आने के कारण, वे खुद को दुविधा में पाते हैं कि क्या वे अपनी फसल को रोके रखें या घाटे पर बेचें. वे इस वर्ष कपास उत्पादन में गिरावट के लिए अनियमित वर्षा को जिम्मेदार मानते हैं.

बाभुलगांव के नायगांव गांव के कपास किसान प्रकाश मधुकर ने बताया कि वह अपनी 15 एकड़ जमीन पर कपास की खेती करते हैं. उन्होंने कहा कि अपने कपास के खेत में प्रति एकड़ 30,000 रुपये से अधिक का निवेश किया और लगभग 70 क्विंटल कपास की पैदावार की. इसे 6,000 रुपये प्रति क्विंटल बेचने पर 7,000 रुपये का नुकसान होगा.

आगे उन्होंने बताया कि मैं पिछले साल से इस उपज का भंडारण कर रहा हूं. लंबे सूत के कपास की कीमत 7,000 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि छोटा सूत 6,000 रुपये में बिकता है. मेरी उपज में दोनों का मिश्रण है, कीमत आदर्श रूप से कम से कम 10,000 रुपये होनी चाहिए. गावंडे ने कहा, ‘मैंने बीज और उर्वरक पर 2.5 लाख रुपये खर्च किए और उस पर 18% जीएसटी का भुगतान किया.

उनका कहना है कि सरकारी योजनाएँ हमारे घाटे को कवर करने के लिए अपर्याप्त हैं. हम बेहतर कीमत की उम्मीद में इस उपज का भंडारण करके, इसे बारिश और हवा से बचाकर एलर्जी का जोखिम उठा रहे हैं. गवांडे ने कहा कि पिछले साल जिले में लगभग 4.71 लाख एकड़ भूमि पर कपास की खेती की गई थी. उन्होंने कहा, कपास की महत्वपूर्ण खेती के कारण यवतमाल राज्य के कपास जिले के रूप में प्रसिद्ध है. दुर्भाग्य से राज्य में किसानों की आत्महत्या की संख्या भी सबसे अधिक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *