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आधार कार्ड में जन्मतिथि और नाम बदलना हुआ मुश्किल, UIDAI के नए नियम से आवेदकों की बढ़ी परेशानी

August 10, 2024 Durgesh Yadav 1 min read
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आधार कार्ड में जन्मतिथि और नाम बदलवाने की प्रक्रिया अब और भी कठिन हो गई है. यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने हाल ही में नियमों में बदलाव किया है, जिससे आवेदकों को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. नए नियमों के अनुसार, अब आधार कार्ड में जन्मतिथि और नाम में बदलाव केवल निर्धारित प्रमाणपत्रों के आधार पर ही किया जा सकेगा.

नए नियमों के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र

UIDAI के नए नियमों के अनुसार, जन्मतिथि में किसी भी प्रकार का संशोधन करने के लिए अब जन्म प्रमाणपत्र और हाईस्कूल की मार्कशीट अनिवार्य हो गई है. पहले, पंचायत के प्रधान, विधायक या किसी PCS अधिकारी से प्रमाणित पत्र के माध्यम से भी जन्मतिथि और नाम में बदलाव किया जा सकता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह से बदल गई है.

नाम में बदलाव के लिए भी प्रक्रिया काफी जटिल हो गई है. अगर किसी व्यक्ति को अपने पूरे नाम में परिवर्तन करवाना है, तो उसे अब भारत सरकार की गजट प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा. नाम में मामूली संशोधन के लिए केवल दो अवसर ही प्रदान किए जा रहे हैं, जोकि पहले की तुलना में काफी सख्त हो गया है.

आवेदकों की बढ़ती परेशानी

नए नियमों के चलते, आधार कार्ड में जन्मतिथि और नाम बदलवाने की प्रक्रिया आवेदकों के लिए एक बड़ी समस्या बन गई है. खासकर, वे लोग जो हाईस्कूल पास नहीं हैं या जिनके पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है, उन्हें इस प्रक्रिया में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

कानपुर जिले के आधार सेवा केंद्र के ऑपरेशन मैनेजर अजय कुमार के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य कर दिया गया है. वहीं, 18 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए हाईस्कूल की फोटो वाली मार्कशीट का होना आवश्यक है. जो लोग सरकारी सेवा में हैं, वे अपने पहचान पत्र का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन हाईस्कूल पास न करने वाले लोग और महिलाओं के लिए यह नियम परेशानी का सबब बन गया है.

प्रमाणपत्रों की वैधता के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया

अगर किसी व्यक्ति के पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं है और उसे बनवाने में कठिनाई हो रही है, तो उसके लिए भी UIDAI ने कुछ उपाय प्रदान किए हैं. ऐसे मामलों में आवेदकों को पंचायत के प्रधान के लेटरपैड पर प्रमाणपत्र लेना होगा, पड़ोसियों से पूछताछ की जाएगी, और एक हलफनामा बनवाकर माता-पिता के आधार कार्ड के साथ जमा करना होगा. इसके अलावा, किसी एमबीबीएस डॉक्टर के पर्चे पर उम्र की प्रमाणिकता कराना भी जरूरी हो गया है, जिसे आधार कार्यालय में जमा करने के बाद ही जन्मतिथि में बदलाव किया जा सकेगा.

आधार कार्ड में गलतियों का सुधार भी हुआ मुश्किल

आधार कार्ड के महत्व को देखते हुए, सरकार ने इसे कई सरकारी योजनाओं, बैंक खाते, मोबाइल, पैन कार्ड आदि से लिंक कर दिया है. लेकिन इस प्रक्रिया में कई गलतियां भी सामने आई हैं. कई आवेदकों के नाम, पता, और जन्मतिथि की गलत जानकारी फीड की गई, जिसके कारण उन्हें आधार सेवा केंद्रों पर जाकर इन त्रुटियों को सुधारना पड़ा. नए नियमों के तहत, अब यह सुधार प्रक्रिया भी आसान नहीं रही.

सरकार की ओर से नए नियमों की जरूरत

UIDAI द्वारा किए गए इन बदलावों का उद्देश्य आधार कार्ड में दी गई जानकारी को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना है। हालांकि, इन कड़े नियमों के कारण आवेदकों को पहले से अधिक मेहनत करनी पड़ रही है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आधार कार्ड में दी गई जानकारी पूरी तरह से सत्यापित हो और उसका उपयोग किसी भी प्रकार के धोखाधड़ी के लिए न हो सके।

नए नियमों का व्यापक असर

आधार कार्ड में जन्मतिथि और नाम बदलवाने के लिए नए नियमों का व्यापक असर देखा जा रहा है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां लोगों के पास आवश्यक प्रमाणपत्रों की उपलब्धता नहीं होती, वहां आवेदकों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. सरकार और UIDAI को इन समस्याओं का समाधान खोजने के लिए और अधिक प्रयास करने की जरूरत है, ताकि आवेदकों को इस नई प्रक्रिया में कम से कम कठिनाइयों का सामना करना पड़े.

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