Breaking
Latest: Follow our breaking news coverage for all updatesLatest News from India and around the worldLatest: Follow our breaking news coverage for all updatesLatest News from India and around the world
Sat, Apr 25, 2026 | New Delhi ☀
World

जापान सुप्रीम कोर्ट ने जबरदस्ती नसबंदी का शिकार हुए लोगों के लिए सरकार से मुआवजा देने को कहा

July 4, 2024Lavi Rana 1 min read
court3

एक बहुत ही ऐतिहासिक फैसला जापान के सुप्रीम कोर्ट के द्वारा लिया गया है. जापान की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि जितने भी लोगों की 1950 से 1970 के बीच में जबरदस्ती नसबंदी की गई थी उन लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए.

court
जापान की सुप्रीम कोर्ट ने लिया एक ऐतिहासिक फैसला

25000 की जबरदस्ती की गई थी नसबंदी

जापान में 1950 से 1970 तक जबरदस्ती की गई नसबंदि को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों की जबरदस्ती ‘यूजेनिक्स प्रोटक्शन लॉ’ के तहत जबरदस्ती नसबंदी की गई थी, उन लोगों को सरकार अब एक उचित मुआवजा दे, क्योंकि अब वह लॉ निरस्त कर दिया गया है. यह कानून जापान में उन लोगों के लिए बनाया गया था जो शारीरिक रूप से संतान पैदा करने में अक्षम है. उस समय यह करने का एक कारण यह भी बताया गया कि यह पैदा होने वाले बच्चों में किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानियों और कमियों को रोकने के लिए कानून बनाया गया था. जिसके तहत लगभग 25000 लोगों की नसबंदी बिना उनकी सहमति के की गई थी.

court1
‘यूजेनिक्स प्रोटक्शन लॉ’ के तहत जबरदस्ती नसबंदी की गई

कोर्ट ने संविधान के खिलाफ बताया कानून

जापान में स्थित वादी के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह कानून युद्ध के बाद के समय का सबसे बड़ा मानव के अधिकारों को हनन करने वाला कानून है. कोर्ट ने भी इस 1948 के कानून को संविधान के खिलाफ बताया. 29 में से 11 वादियों ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाने के लिए पहले पांच निचली अदालत में मुकदमे को लड़ना पड़ा. अभी जो वादी बचे हैं उनके मुकदमे पेंडिंग है. बहुत से बड़ी अब ऐसे हैं जो व्हीलचेयर पर आ चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सभी वादी खुश है और कोर्ट का शुक्रिया कर रहे हैं.

courtd
वादी किता

प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा पीड़ितों से मांगी माफी

एक वादी किता से पूछताछ के दौरान पता चला कि उसकी नसबंदी महज़ 14 साल की उम्र में कर दी गई थी. उसे वक्त वह अनाथालय में रहते थे. उन्होंने इस बात को उनकी पत्नी की मृत्यु के बाद सबके सामने रखा. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का आज तक दुख है कि उनकी वजह से आज उनका एक भी बच्चा नहीं है. जिस पर प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने सभी इस कानून से पीड़ित पीड़ितों से माफी मांगते हुए कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर माफी मांगने के लिए वीडियो से मुलाकात करेंगे और सरकार मुआवजा योजना के बारे में जरूर सोचेगी.

Tags:
Home
Google_News_icon
Google News
Facebook
Join