Breaking
Latest: Adani Power’s Bold Move into Nuclear EnergyAutomotive Sales Cool Off in April 2026, Marking a Return to NormalIndia’s Economy in April 2026: Holding Steady in Uncertain TimesLatest: Adani Power’s Bold Move into Nuclear EnergyAutomotive Sales Cool Off in April 2026, Marking a Return to NormalIndia’s Economy in April 2026: Holding Steady in Uncertain Times
Thu, Oct 22, 2026 | New Delhi —
Politics

संसद भवन पर RJD का विवादित ट्वीट। नए संसद भवन की तुलना ताबूत से की।

May 28, 2023 • Rupali Parihar• 1 min read
sansad

नए संसद भवन के उद्घाटन के मुद्दे पर राजनीति जारी है। इसे लेकर बिहार के राष्ट्रीय जनता दल ने ट्विटर पर विवादास्पद फोटो पोस्ट की है। राजद ने एक ताबूत की तस्वीर के साथ नए संसद भवन की तुलना करते हुए लिखा कि ये क्या है? बता दें कि राजद का यह ट्वीट ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के नए भवन का उद्घाटन किया है।

नए संसद भवन की तुलना ताबूत से की।

लालू यादव की पार्टी ने शर्मनाक ट्वीट किया। आरजेडी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक फोटो शेयर की गई। इसमें संसद भवन की डिजाइन की तुलना ताबूत से की गई। लोगों को यह बात जरा भी पंसद नहीं आई। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि जिन्हें संसद भवन ताबूत लग रहा हो, वो यहां कदम ना रखें। वहीं भाजपा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, आप (RJD) नजरबट्टू हैं, और कुछ नहीं।

भाजपा ने किया पलटवार

राजद के इस ट्वीट की आलोचना भी शुरू हो गई है। भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राजद के इस ट्वीट पर पलटवार करते हुए लिखा कि ‘आज एक ऐतिहासिक पल है और देश गौरवान्वित है। आप नजरबट्टू हैं और कुछ नहीं। छाती पीटते रहिए। 2024 में देश की जनता आपको इसी ताबूत में बंद करके गाड़ देगी और नए लोकतंत्र के मंदिर में आप को आने का मौका भी नहीं देगी। चलिए यह भी तय हुआ कि संसद देश की और ताबूत आपका।’

RJD प्रवक्ता ने दी सफाई।

आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने ट्वीट पर स्पष्टीकरण देते हुए एबीपी न्यूज़ से कहा, ”हमने जो यह चिन्ह लगाया है वो इसलिए लगाया है कि राजनीति और लोकतंत्र का ताबूतीकरण नहीं करें. हमने शुरू से कहा है कि लोकतंत्र का मंदिर संवाद का है. संवादहीनता जिस तरह से देश में बढ़ा है.जिस तरह से अधिनायकवाद थोपने की कोशिश की जा रही है.संविघान का मजाक उड़ाया जा रहा है. हमने किसी मर्यादा और सीमा को लांघा नहीं है. लोकतंत्र के मंदिर के ताबूतीकरण पर सवाल लाजमी हैं. आज अगर प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रपति भी होतीं तो और अच्छे चित्र आते. लेकिन यह आत्ममुग्धता की दहलीज पर खड़े होकर जिस तरह का इवेंट किया जा रहा है और महिमा मंडन हो रहा है. यह किसी का इवेंट नहीं हो सकता है.”

Home
Google_News_icon
Google News
Loan
Facebook
Join