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Politics

मैं राजशाही का नहीं लोकतंत्र का प्रतीक हूं।

March 20, 2023 Megha Jain 1 min read
digviay

राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले दिग्विजय सिंह के लिए कहा जाता है कि वे पर्दे के पीछे रहकर राजनीति करते हैं और कमलनाथ को मुख्यमंत्री का ताज दिलाने में दिग्विजय सिंह की अहम भूमिका रही है. दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश की सियासत में कांग्रेस की अहम कड़ी माने जाते हैं, दिग्गी राजा को उनके दौर के उन चुनिंदा नेताओं में गिना जाता है, जो सिर्फ अपनी रणनीति के दम पर सियासी धारा का रुख बदलने में माहिर माने जाते हैं. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत से गिरी कमलनाथ सरकार की घर वापसी कराने वाला सिर्फ एक ही करिश्माई नेता है, जो हाथ के पंजे से कमल को मसलकर कमलनाथ को एमपी का नाथ बना सकता है.

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि उन्हें ‘ राजा साहब ‘ न कहा जाए। दिग्विजय कहें या नाम के आगे “जी” लगा लें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र राजशाही में नहीं जनता के राज में होता है। मैं राजशाही का नहीं लोकतंत्र का प्रतीक हूं।

हमलावर रहते। हैं बीजेपी पर

वह रविवार को रवींद्र भवन में लोकतंत्र में युवाओं की भूमिका विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। यहां मौजूद कुछ लोग उन्हें राजा साहब बोल रहे थे, इस कारण उन्होंने आपत्ति की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में तानाशाही चलाना चाहते हैं। अदाणी की बात संसद में नहीं करने दी जा रही है। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक कार्यकर्ता सुनील आदिवासी ने किया था।

दिग्विजय ने कहा कि देश में जितनी आबादी, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की है, उसी अनुपात में उनके लिए बजट का प्रविधान किया जाना चाहिए। कुछ राज्यों ने इसके लिए नियम भी बनाया है।

उन्‍होंने कहा कि प्रदेश में इनका बजट बड़े-बडे आयोजनों, पंडाल लगाने में और उन्हें वाहनों में भरकर लाने में खर्च हो रहा है। यह मानसिकता है भाजपा की। शिक्षा के माध्यम से इन्हें आगे लाया जा सकता है, पर अभी बैकलाग के पद खाली हैं। एसटी-एससी को जो पट्टे दिए गए थे वह रद किए गए। भाजपा के राज में सबसे ज्यादा आदिवासियाें की जमीन बिकी है। दरअसल, उनकी मानसिकता मनुवादी है। ऐसी ही सोच अधिकरियों-कर्मचारियों की है।

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