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नई दिल्ली: अनुभवी राजनेता गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को दावा किया कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला सार्वजनिक जांच से बचने के लिए रात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ गुप्त बैठके की है. डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी प्रमुख ने एक इंटरव्यू के दौरान यह आरोप लगाया है. उन्होंने आगे कहा कि अब्दुल्ला अपने रुख में दोहरेपन का आरोप लगाते हुए श्रीनगर में कुछ और जम्मू में कुछ और और दिल्ली में कुछ और कहते हैं.

गुलाम नबी का दावा

आज़ाद ने दावा किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी का नेतृत्व करने वाले अब्दुल्ला ने 2014 में भाजपा के साथ गठबंधन बनाने के लिए सोच-समझकर प्रयास किए थे. पिता-पुत्र की जोड़ी पर दोहरा खेल खेलने का आरोप लगाते हुए, उन्होंने फारूक अब्दुल्ला का हवाला दिया . जहां उन्होंने भविष्य में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होने का संकेत दिया, जिसे बाद में उमर अब्दुल्ला ने नकार दिया.

इसी के साथ आजाद ने कहा, फारूक और उमर सरकार और विपक्ष दोनों को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं. पूर्व कांग्रेस नेता ने खुलासा किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) दोनों जम्मू-कश्मीर में भाजपा के साथ सरकार बनाने की बेताब कोशिश कर रहे हैं.

आज़ाद ने अनुच्छेद 370 के विवादास्पद निरस्तीकरण से ठीक पहले 3 अगस्त, 2019 को अब्दुल्ला और पीएम मोदी के बीच एक कथित बैठक को भी प्रकाश में लाया. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में अफवाहें फैलीं कि निर्णय के बारे में अब्दुल्ला को विश्वास में लिया गया था, और किया गया था. यहां तक कि घाटी के नेताओं को नजरबंद करने का भी सुझाव दिया.

खुद को सबसे धर्मनिरपेक्ष नेता के रूप में पेश करते हुए आज़ाद ने कहा, मैं अब्दुल्लाओं की तरह धोखाधड़ी नहीं करता. मैं अपने हिंदू भाइयों को बेवकूफ बनाने के लिए मंदिरों में नहीं जाता, और मैं कट्टरपंथी इस्लामवादियों को खुश करने के लिए अपने देश का दुरुपयोग नहीं करता.

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