आजकल कृषि क्षेत्र में नए-नए अवसर सामने आ रहे हैं. इनमें से एक है Jojoba की खेती, जो न केवल लाभदायक है, बल्कि इसे कम लागत में भी किया जा सकता है. Jojoba का तेल विशेषकर इसकी उच्च गुणवत्ता के कारण बाजार में काफी महंगा बिकता है.
जोजोबा की विशेषताएँ

Jojoba एक ऐसा पौधा है, जो सूखी और कठोर जलवायु में भी जीवित रह सकता है. यह मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका, विशेषकर मेक्सिको में पाया जाता है. जोजोबा का तेल बायोडीजल, कॉस्मेटिक उत्पादों, और औषधियों में उपयोग होता है, जिससे इसकी मांग बढ़ रही है. इसके अलावा, Jojoba के बीजों से निकलने वाला तेल अत्यधिक महंगा होता है, जिससे किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
जोजोबा की खेती के फायदे

- कम पानी की आवश्यकता: Jojoba की खेती के लिए बहुत कम पानी की जरूरत होती है, जिससे यह सूखे वाले क्षेत्रों के लिए एक उपयुक्त फसल बनती है.
- लंबी उम्र: Jojoba के पौधे लगभग 100 साल तक जीवित रह सकते हैं, जिससे लंबे समय तक फसल उत्पादन संभव होता है.
- उच्च बाजार मूल्य: जोजोबा का तेल अन्य तेलों की तुलना में महंगा बिकता है, जिससे किसानों को अच्छे मुनाफे की संभावना होती है.
- पर्यावरण अनुकूल: जोजोबा का पौधा मिट्टी के लिए फायदेमंद होता है और भूमि का क्षरण रोकता है.
Jojoba की खेती कैसे करें
जोजोबा की खेती करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
- भूमि का चयन: Jojoba के लिए रेतीली और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. मिट्टी का pH स्तर 7-8 के बीच होना चाहिए.
- बीज की बुवाई: जोजोबा के बीजों को सीधे जमीन में बोया जा सकता है. बुवाई के समय फसल के लिए पर्याप्त जगह छोड़ना जरूरी है.
- सिंचाई: शुरुआती दिनों में पौधों को नियमित रूप से पानी देना चाहिए, लेकिन बाद में प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर रह सकते हैं.
- कटाई: जोजोबा के पौधे 3-5 साल में फल देना शुरू करते हैं. फल जब पक्के हो जाएं, तब उन्हें काटा जा सकता है.
आर्थिक पहलू

जोजोबा की खेती से किसान प्रति एकड़ लाखों रुपये कमा सकते हैं. एक बार बीज बुआई के बाद, जोजोबा के पौधे कई वर्षों तक उत्पादन करते हैं. यदि किसान सही तकनीक और प्रबंधन अपनाते हैं, तो वे प्रति वर्ष अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं.
सरकार का समर्थन
सरकार भी Jojoba की खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएँ चला रही है. किसान कृषि विभाग से मदद ले सकते हैं, जिसमें प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता शामिल है. इसके अलावा, कई गैर-सरकारी संगठन भी इस क्षेत्र में किसानों को सहयोग प्रदान कर रहे हैं.