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भारत का मानवरहित पनडुब्बी निर्माण: चीन और पाकिस्तान की पनडुब्बियों के लिए खतरा

September 12, 2024 Durgesh Yadav 1 min read
Big achievement by Indians

भारतीय नौसेना अब मानवरहित जलमग्न पनडुब्बियों के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. इस योजना के तहत, भारत अत्याधुनिक मानवरहित पनडुब्बियों का निर्माण करेगा जो दुश्मन की पनडुब्बियों और सतह के जहाजों पर प्रभावी हमला कर सकेंगी. इस परियोजना की लागत 2,500 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. आने वाले महीनों में इस परियोजना के लिए निविदाएं जारी की जाएंगी.

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प्रोजेक्ट की योजना और लागत

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में भारतीय नौसेना के लिए मानवरहित जलमग्न पोतों के निर्माण को मंजूरी दी है. इस परियोजना के तहत 100 टन के मानवरहित पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा, जिनकी लागत 2,500 करोड़ रुपये से अधिक होगी. इन पनडुब्बियों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा ताकि वे दुश्मन की पनडुब्बियों और पानी की सतह पर मौजूद जहाजों पर हमला कर सकें.

पोतों की क्षमताएं और उपयोग

नौसेना के सूत्रों के अनुसार, ये मानवरहित पनडुब्बियाँ सामान्य आकार की पनडुब्बियों से बड़ी होंगी और इनमें हमले की विशेष क्षमताएं होंगी. पूर्व उपप्रमुख वाइस एडमिरल एसएन घोरमडे के अनुसार, ये पोत नौसेना को पानी के भीतर विशिष्ट क्षमताएं प्रदान करेंगे, जिससे कई अभियानों में मदद मिलेगी.

इन पोतों का उपयोग बारूदी सुरंगें बिछाने, बारूदी सुरंगें हटाने, निगरानी करने और हथियार दागने जैसे कार्यों में किया जाएगा. भारतीय नौसेना ने आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत भारतीय शिपयार्ड से इस परियोजना के लिए निविदा जारी करने की योजना बनाई है.

निगरानी और सुरक्षा

नौसेना का लक्ष्य है कि ये मानवरहित पनडुब्बियां तट से दूर, लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकें. इससे संदिग्ध जहाजों की आवाजाही और अन्य गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी. इन पोतों की मदद से राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना आसान होगा और समुद्री सुरक्षा को मजबूत किया जा सकेगा.

भविष्य की दिशा

भारतीय नौसेना मानवरहित निगरानी पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है. इसके तहत, ड्रोनों के अलावा एमक्यू-9बी जैसे ड्रोनों को शामिल किया जाएगा, ताकि लंबी दूरी की निगरानी क्षमताओं को और बेहतर किया जा सके.

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निष्कर्ष

भारत की यह नई परियोजना, मानवरहित जलमग्न पनडुब्बियों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे न केवल भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति में वृद्धि होगी, बल्कि यह चीन और पाकिस्तान की पनडुब्बियों के लिए भी एक बड़ा चुनौती बनेगा. इस परियोजना की सफलता से भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक क्षमताओं में महत्वपूर्ण सुधार होगा.

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