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Politics

देश की नजर कर्नाटक पर।जल्द होगा फैसला

May 9, 2023 Megha Jain 1 min read
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कर्नाटक चुनाव में फैसले की घड़ी नज़दीक है। 10 मई को वोटिंग के बाद 13 को नतीजे सामने आ जाएंगे। जनता का फैसला किसके पक्ष में आएगा? इसका इंतजार सिर्फ कर्नाटक के लोगों को नहीं है। उत्तर भारतीयों की नजरें भी कर्नाटक चुनाव पर टिकी हुई हैं।

दोनों ही पार्टी बीजेपी हो या कांग्रेस अपनी अपनी ताकत इस चुनाव में झोंक रही है कई पार्टी के बड़े नेता बड़े स्टार प्रचारक इस चुनाव में जनता का मन टटोलने मैं लगे हैं। र हैं तो वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लगातार दौरे पर हैं।

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया हैं मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि राज्य में एक चरण में 10 मई को मतदान होगा. नतीजे 13 मई को आएंगे. कर्नाटक विधानसभा चुनाव को 2024 का सेमीफाइनल माना जा रहा है.
कर्नाटक विधानसभा के सभी 224 सीटों के लिए, विधानसभा चुनाव होना है 24 मई 2023 को समाप्त होने वाला है. पिछला विधानसभा चुनाव मई 2018 में हुआ था.

पहले जानिए 2018 में क्या हुआ था?
कर्नाटक में पिछली बार 12 मई 2018 को विधानसभा चुनाव हुए थे। चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं था। भाजपा के 104 प्रत्याशी चुनाव जीत गए थे। कांग्रेस को 78 और JDS को 37 सीटों पर जीत मिली थी। सबसे बड़ी पार्टी होने के चलते भाजपा के बीएस येदियुरप्पा ने 17 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, वह सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाए।

किसकी सरकार हैं कर्नाटक में।

विशेष रूप से, कर्नाटक दक्षिण में एकमात्र राज्य है जहां भाजपा सत्ता में है
बसवराज सोमप्पा बोम्मई एक भारतीय राजनेता और भारत के राज्य कर्नाटक के 23 वें और वर्तमान मुख्यमत्री हैं। बसवराज बोम्मई 2008 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और तब से लगातार पार्टी में ऊपर चढ़ते चले गए. वह पहले राज्य सरकार में जल संसाधन मंत्री रहे हैं| 

बसवराज बोम्मई: जेडीयू से बीजेपी में आए, 22 महीने से मुख्यमंत्री

बीजेपी के मौजूदा मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई हर किसी के पसंदीदा चेहरा नहीं हैं, भले ही पार्टी अपने दम पर बहुमत हासिल कर ले. बोम्मई भाजपा और आरएसएस के लिए एक ‘बाहरी’ हैं. 2006 में बीएस येदियुरप्पा के कहने पर जनता दल (यूनाइटेड) छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए. जुलाई 2021 में येदियुरप्पा को हटाने के बाद पार्टी हाइकमान ने सरकार का नेतृत्व करने के लिए बोम्मई को चुना. उन्होंने पिछले 22 महीनों से खुद को मेहनती साबित किया है और एक अच्छा ‘होल्डिंग ऑपरेशन’ किया है.

सरकार बनाने के लिए बहुमत का निशान 113 सीटों का है।
भारतीय जनता पार्टी की सरकार कई राज्यों में हैं।राज्य में विकास के कार्यों की गिनती से भारतीय जनता पार्टी ने जनता का दिल टटोला है। और राज्यों के लिए कई विकास के कार्य किए हैं।

देशभर में प्रत्येक विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ दिलचस्प भी होता है. विविधताओं से भरे देश में हर जगह के अपने अलग मुद्दे और चुनौतियां देखने को मिलती रही हैं. कर्नाटक में चुनावी शोर के बीच अलग-अलग पार्टियों से बड़े-बड़े चेहरे मुख्यमंत्री की रेस में खुद को आगे करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं. यहां हम इन दावेदारों के सकारात्मक और नकारात्मक पॉइंट पर चर्चा करेंगे.

सिद्धारमैया: लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के बड़े दावेदार।

पूर्व सीएम सिद्धारमैया मैसूरु जिले के सिद्धारमनहुंडी से आते हैं और 2013 से 2018 तक मुख्यमंत्री रहे हैं. अगर कांग्रेस को राज्य में 113 सीटों का साधारण बहुमत मिलता है तो सिद्धारमैया कांग्रेस पार्टी की शीर्ष पसंद हो सकते हैं. हालांकि, 2018 के चुनाव में जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे और कैंपेन की कमान खुद संभाले थे, तब कांग्रेस पार्टी 122 सीटों से 80 सीटों पर आकर सिमट गई थी और हार का सामना करना पड़ा था. फिर भी ‘गांधी परिवार’, विशेष रूप से राहुल गांधी का मानना ​​है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने और कांग्रेस की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए सिद्धारमैया सबसे बड़ा दांव होंगे

कांग्रेस के संकचमोटक डीके शिवकुमार।
सिद्धारमैया की ही तरह कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार की भी राजनीतिक महत्वकांक्षाएं हैं. वो भी लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं और उन्होंने हर मौके पर पार्टी को संकट से निकालने का काम किया. यही वजह है कि उन्हें कांग्रेस का संकटमोचक भी कहा जाता है. डीके शिवकुमार का कद इतना बड़ा है कि उनका लोहा बीजेपी नेता येदियुरप्पा भी मानते हैं. उन्होंने कांग्रेस को कर्नाटक से लेकर गुजरात और अन्य राज्यों में संभालने का काम किया है.  

शिवकुमार भी हो सकते हैं सीएम के तौर पर पेश।

कर्नाटक की राजनीति में डीके शिवकुमार कई बार बीजेपी को मात दे चुके हैं. कुछ मौके ऐसे भी थे जब उन्होंने बीजेपी से मुंह से सत्ता छीन ली थी. डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जिसे कर्नाटक में लिंगायत की ही तरह सियासी मायनों में काफी अहम माना जाता है. पूर्व पीएम और जेडीएस नेता एचडी देवेगौड़ा भी इसी समुदाय से आते हैं. शिवकुमार के समर्थकों का दावा है कि उन्होंने देवेगौड़ा के वोक्कालिगा वोट बैंक को कांग्रेस की तरफ खींचने का काम किया है. डीके शिवकुमार कर्नाटक के सबसे अमीर नेताओं में शामिल हैं. उनकी संपत्ति 1400 करोड़ रुपये से ज्यादा है. यानी डीके शिवकुमार कर्नाटक में कांग्रेस के बड़े और ताकतवर नेता हैं. यही वजह है कि उनके समर्थक नेताओं ने लोगों के बीच उन्हें अगले सीएम के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है. 

बीजेपी की तरफ से उम्मीदवार कौन।

बीजेपी में सीएम बसवराज बोम्मई और बीएस येदियुरप्पा के अलावा केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी भी बीजेपी के कर्नाटक में संभावित सीएम चेहरा है. वहीं कांग्रेस में भी पूर्व सीएम सिद्धरमैया के अलावा कई नाम से चल रहे हैं.

बसवराज बोम्मई बनेंगे दोबारा सीएम।

सबसे पहले बात करते हैं बीजेपी की. बीजेपी की कर्नाटक में मौजूदा सरकार है और बसवराज बोम्मई सीएम है. लेकिन बीजेपी ने बिना सीएम चेहरे के चुनाव में जाने का फैसला किया है. ऐसे में अगर कर्नाटक में बीजेपी सत्ता में वापसी करती है तो बसवराज बोम्मई का सीएम के तौर पर दावा अपने आप मजबूत हो जाता है. बसवराज बोम्मई को पार्टी ने उनकी पारंपरिक शिगगांव विधानसभा सीट से टिकट दिया है.

येदियुरप्पा पर दांव लगाएगी बीजेपी।

कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा भेल ही चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन वो कर्नाटक में बीजेपी के पहले सीएम रह चुके हैं. वो लिंगायत समुदाय से आते हैं और दक्षिण राज्य में बीजेपी को सत्ता दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. ऐसे में चुनाव जीतने की स्थिति में बीजेपी उन पर दांव खेल सकती है. हालांकि उनकी उम्र उनकी राह में रोड़ा बन सकती है. वो भले ही चुनाव

कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा भेल ही चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन वो कर्नाटक में बीजेपी के पहले सीएम रह चुके हैं. वो लिंगायत समुदाय से आते हैं और दक्षिण राज्य में बीजेपी को सत्ता दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. ऐसे में चुनाव जीतने की स्थिति में बीजेपी उन पर दांव खेल सकती है. हालांकि उनकी उम्र उनकी राह में रोड़ा बन सकती है. वो भले ही चुनाव
ना लड़ रहे हों लेकिन उनके बेटे विजयेंद्र शिकारीपुरा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.


पूरे देश की नजर कर्नाटक के चुनावी नतीजे पर है अब देखना यह होगा कि जनता अपना मन किसके लिए बना चुकी हैं कौन होगा इस बार कर्नाटक का मुख्यमंत्री किसे जनता पहन आएगी मुख्यमंत्री पद का ताज जल्द ही आयेंगे नतीजे

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