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रूस ने और भारत को दिया झटका।रूस रुपये में भुगतान लेने से पीछे हटा

May 6, 2023 Megha Jain 1 min read
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मोदी सरकार के रुपये को इंटरनेशनल करेंसी बनाने के प्रयासों को बड़ा झटका लगता नजर आ रहा है. भारत और रूस के बीच रुपये में व्यापार को लेकर बात नहीं बन पाई है. रूस रुपये में भुगतान लेने से पीछे हट गया है. न्यूज एजेंसी रायटर्स की एक खबर के मुताबिक भारत और रूस के बीच रुपये में द्विपक्षीय व्यापार करने के प्रयास बंद कर दिये गए हैं. यह बातचीत पिछले कई महीने से जारी थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस रुपये में भुगतान लेने के लिए तैयार नहीं हुआ है. 

वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी महज 2 फीसद है जिस कारण देश भारतीय रुपये को अपने पास नहीं रखना चाहते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक ने जुलाई 2022 में रुपये में भुगतान तंत्र की घोषणा की थी. इसके बाद से भारत ने रूस से व्यापार के लिए कई बार रुपये में भुगतान किया भी है.
इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले दो भारतीय अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को यह जानकारी दी है. अधिकारियों ने कहा कि दोनों देशों के बीच रुपये में व्यापार के प्रयास असफल रहे हैं.

भारत के लिए बड़ा झटका

यह रूस से सस्ता तेल और कोयला खरीदने वाले भारतीय आयातकों के लिए एक बड़ा झटका होगा. भारत के ये आयातक इस बात का इंतजार कर रहे थे कि भारत-रूस के बीच स्थायी रुपया भुगतान तंत्र स्थापित हो जाए जिससे उनकी मुद्रा रूपांतरण लागत कम हो.

भारत और रूस के बीच व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है. पहले भारत रूस से जितनी मात्रा में हथियारों की खरीद करता था, उतने ही मूल्य की अपनी चीजों को रूस को निर्यात करता था. लेकिन यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से रूस से भारत का आयात 400 फीसद बढ़ गया है जबकि निर्यात लगभग 14 फीसद कम हो गया है. इस व्यापार घाटे को पाटने के लिए दोनों देशों ने रुपये में व्यापार के लिए बातचीत शुरू की थी लेकिन अब यह नाकाम हो गया है.

रूस के बैंकों में पड़े हैं भारत के अरबों रुपये

एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि रूस का मानना है कि अगर भारत के साथ रुपये में भुगतान तंत्र को अपनाया जाए तो हर साल रूस के पास 40 अरब डॉलर से अधिक रुपया जमा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि रूस का मानना है कि इतना ज्यादा रुपया जमा करना रूस के लिए किसी काम का नहीं है.

भारतीय रुपये को पूरी तरह से दूसरे देशों की मुद्रा में नहीं बदला जा सकता है. वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी महज 2 फीसद है जिस कारण देश भारतीय रुपये को अपने पास नहीं रखना चाहते हैं.

भारतीय रिजर्व बैंक ने जुलाई 2022 में रुपये में भुगतान तंत्र की घोषणा की थी. इसके बाद से भारत ने रूस से व्यापार के लिए कई बार रुपये में भुगतान किया भी है. इस कारण रूस के बैंकों में भारत के अरबों रुपये पड़े हुए हैं. रूस उस पैसे को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता क्योंकि पश्चिम ने उस पर प्रतिबंध लगाए हैं. ऐसे में उसके बैंकों में पड़े रुपये अपना मूल्य खोते जा रहे हैं. भारत और रूस ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार को सुविधाजनक बनाने को लेकर बात की लेकिन दिशानिर्देशों को औपचारिक रूप नहीं दिया गया.

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