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Religion/Astrology

रविवार को सूर्य को चढ़ाएं जल सभी दिक्क़ते होगी दूर।

April 29, 2023 Rupali Parihar 1 min read
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सूर्यदेव को ग्रहों का राजा माना जाता है. उन्हें कलयुग में एकमात्र दृश्य देवता के तौर पर भी पहचाना जाता है. हिंदू धर्म में सूर्य देव का विशेष महत्व माना गया है. सूर्यदेव के नियमित पूजन से जीवन में शांति और खुशहाली आती है। धार्मिक मान्यता है कि सूर्य देव को अर्घ्य देने से सभी तरह के कष्टों से छुटकारा मिलता है. अगर किसी जातक की कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में है तो सिर्फ जल चढ़ाकर भी सूर्य को मजबूत किया जा सकता है।

रविवार को सूर्य को चढ़ाएं जल।

रविवार का दिन सूर्य देवता का दिन माना जाता है। इस दिन उन्हें जल चढ़ाने से हमारे जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को सभी ग्रहों का अधिपति माना जाता है। सूर्य को जल तांबे के पात्र से ही चढ़ाएं। जल में चुटकीभर रोली मिला लें। जल में लाल फूल भी डाल दें। जल चढ़ाते समय सूर्य मंत्र ‘ॐ सूर्याय नमः ॐ खगाय नमः ॐ भास्कराय नमः ॐ रवये नमः ॐ भानवे नमः ॐ आदित्याय नमः’ का जाप जरूर करें। नियम से जल चढ़ाने से कुंडली के सारे दोष खत्म हो जाते हैं।

इन बातो का रखे ध्यान।

सूर्य देव को जल चढ़ाने के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. स्नान के बाद साफ और धुले हुए कपड़े ही धारण करें. ऐसी मान्यता है कि नियमित रूप से सू्र्यदेव को जल चढ़ाने से जीवन में कभी भी धन की समस्या नहीं रहती। संभव हो तो उगते हुए सूर्य को ही जल चढ़ाएं. उगते सूर्य को जल देने से खास फल की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि सुबह के समय सूर्य की निकलने वाली किरणें शरीर का कष्ट दूर करती हैं।  इसलिए रोगों से मुक्ति के लिए उगते हुए सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए। सूर्य देव को जल का अर्घ्य अर्पित करने के बाद तीन बार परिक्रमा अवश्य लगाएं और इसके बाद धरती के पैर छू कर ओम सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें। इस दौरान ऊं आदित्य नम: मंत्र या ऊं घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करना भी फलदायी होता है. सूर्य देव को जल अर्पित करते समय ध्यान रखें कि मुख पूर्व दिशा की ओर ही हो. पूर्व दिशा की ओर सूर्य नजर न आने पर ही दूसरी दिशा की ओर मुख करके ही अर्घ्य दें।

जल चढ़ाते समय ये गलतियां न करें।

कभी भी बिना स्नान किए सूर्यदेव को जल न चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय स्टील, चांदी, कांच और प्लास्टिक के बर्तन का उपयोग न करें। सिर्फ तांबे के पात्र का ही उपयोग करें। जल सिर के ऊपर से अर्पित करें। इससे सूर्य की किरणें हमारे शरीर पर पड़ती है। इससे हमारे सूर्य के नवग्रह भी मजबूत होते हैं।

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