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Tue, Jun 23, 2026 | New Delhi
Health

मां की कोख में पल रहे बच्चे के दिल की सर्जरी, 90 सेकेंड में किया ऑपरेशन।

March 16, 2023 Rupali Parihar 1 min read
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के कार्डियोथोरेसिक साइंसेज सेंटर में अंगूर के आकार के दिल का सफल बैलून डाइलेशन किया गया है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और प्रसूति एवं स्त्री रोग के भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम ने इस प्रक्रिया को सफल बनाया।देश में पहली बार इस तरह का प्रोसीजर किया गया है. डॉक्टरों ने बैलून डाइलेशन सर्जरी करके बच्चे के दिल का बंद वाल्व को खोला। इस सर्जरी को डॉक्टरों ने सिर्फ 90 सेकेंड में पूरा किया। मां व बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।

गर्भ में बच्चे को थी हार्ट प्रॉब्लम।

महिला की पिछली तीन प्रेग्नेंसी लॉस हो गई थीं। डॉक्टरों ने महिला को बच्चे की हार्ट कंडीशन के बारे में बताया था और इसे सुधारने के लिए ऑपरेशन की सलाह दी थी, जिसे महिला व उसके पति ने मान लिया।
टीम ने बताया कि जब बच्चा मां के गर्भ में होता है, तब भी कुछ गंभीर तरीकों के हार्ट डिजीज का पता लगाया जा सकता है। अगर इन्हें गर्भ में ही ठीक कर दिया जाए तो जन्म के बाद बच्चे का स्वास्थ्य बेहतर रहने की संभावना बढ़ जाती है और बच्चे का सामान्य विकास होता है।इस प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों का दावा है कि भ्रूण का दिल बेहतर विकसित होगा और जन्म के समय हृदय रोग कम गंभीर होगा। डॉक्टर ने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया से भ्रूण के जीवन का खतरा हो सकता है। इसे अत्यधिक सावधानी के साथ किया जाता है।

भारत के डॉक्टरों पर गर्व है-पीएम मोदी

मंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को एम्स दिल्ली के डॉक्टरों की टीम के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने 90 सेकंड में अंगूर के आकार के भ्रूण के दिल पर एक सफल दुर्लभ सर्जरी की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश को अपने डॉक्टरों की निपुणता और नवाचार पर गर्व है।

ऑपरेशन में ज्यादा वक्त लगता तो बच्चे को खतरा था।

कार्डियोथॉरासिक साइंसेस सेंटर की टीम के सीनियर डॉक्टर ने बताया कि ऐसा ऑपरेशन गर्भ में पल रहे बच्चे की जान के लिए खतरनाक भी हो सकता है इसलिए इसे बहुत संभल कर परफॉर्म करना होता है। ज्यादातर हम जब ऐसे प्रोसिजर करते हैं, तो वे एंजियोप्लास्टी के तहत होते हैं, लेकिन इसे एंजियोप्लास्टी के तहत नहीं किया जा सकता था।ऑपरेशन में ज्यादा वक्त लगता तो बच्चे को खतरा था
कार्डियोथॉरासिक साइंसेस सेंटर की टीम के सीनियर डॉक्टर ने बताया कि ऐसा ऑपरेशन गर्भ में पल रहे बच्चे की जान के लिए खतरनाक भी हो सकता है इसलिए इसे बहुत संभल कर परफॉर्म करना होता है। ज्यादातर हम जब ऐसे प्रोसिजर करते हैं, तो वे एंजियोप्लास्टी के तहत होते हैं, लेकिन इसे एंजियोप्लास्टी के तहत नहीं किया जा सकता था।

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