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मणिपुर हुआ आग के हवाले। हालात बेकाबू

May 23, 2023 Megha Jain 1 min read
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मणिपुर में एक बार फिर जमीन पर हालात बिगड़ गए हैं। राजधानी इंफाल के न्यू लाम्बुलेन इलाके में लोगों ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया है। स्थिति को देखते हुए सोमवार को सुबह 6 बजे से कर्फ्यू लगा दिया गया और पांच दिन के लिए इंटरनेट सेवाओं को भी सस्पेंड कर दिया गया है।

मणिपुर में इस साल सबसे पहले हिंसा 3 मई को भड़की थी। तब तोरबंग इलाके में आगजनी हुई थी और जमकर बवाल काटा गया था। उसके बाद कई दिनों तक जमीन पर हालात बेकाबू रहे थे, राज्य सरकार को गोली मारने का आदेश भी जारी करना पड़ गया था। उस समय सेना को भी मदद के लिए बुला लिया गया था। उस हिंसा में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

इंफाल में बिगड़े हालात।

बताया जा रहा है कि सोमवार सुबह से ही राजधानी इंफाल में कई जगहों पर हिंसक घटनाओं की खबर थी। असल में न्यू चेकॉन इलाके के एक बाजार में मैतई और कुकी समुदाय के बीच मारपीट हो गई। वो मारपीट ही बाद में और ज्यादा हिंसक रूप ले गई और खाली घरों को आग के हवाले कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए एक बार फिर सेना और अर्धसैनिक बल को जमीन पर तैनात कर दिया गया है।

पहले से था अंदेशा, इंटरनेट सस्पेंड।

वैसे मणिपुर प्रशासन को पहले इस बात का अहसास था कि राज्य में एक बार फिर स्थिति तनावपूर्ण बन सकती है। इसी वजह से रविवार को ही पांच और दिनों के लिए इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया गया था। उस समय गृह मंत्रालय ने एक जारी बयान में कहा था कि इस बात का अंदेशा है कि कुछ आसामाजिक तत्व सोशल मीडिया के जरिए हेट स्पीच, हेट वीडियो को बढ़ावा दें जिससे कानून व्यवस्था को चुनौती दी जा सके। अब सोमवार को वैसी ही स्थिति ब गई, हिंसा हुई, आगजनी हुई और कर्फ्यू भी फिर लगाना पड़ गया

अब इस बार की हिंसा को तभी ठीक तरह से समझा जा सकता है, जब मणिपुर के बैकग्राउंड को भी समझ लिया जाए। असल में मणिपुर में तीन समुदाय सक्रिय हैं- इसमें दो पहाड़ों पर बसे हैं तो एक घाटी में रहता है। मैतेई हिंदू समुदाय है और 53 फीसदी के करीब है जो घाटी में रहता है। वहीं दो और समुदाय हैं- नागा और कुकी, ये दोनों ही आदिवासी समाज से आते हैं और पहाड़ों में बसे हुए हैं। अब मणिपुर का एक कानून है, कहता है कि मैतेई समुदाय सिर्फ घाटी में रह सकते हैं और उन्हें पहाड़ी क्षेत्र में जमीन खरीदने का कोई अधिकार नहीं होगा। ये समुदाय चाहता जरूर है। इसे अनुसूचित जाति का दर्जा मिले, लेकिन अभी तक ऐसा हुआ नहीं है

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