SEBI बोर्ड की आज की बैठक में F&O ट्रेडिंग पर कड़े नियम लाने पर विचार किया जाएगा, ताकि छोटे निवेशकों को भारी नुकसान से बचाया जा सके।
MF-lite नियमों के जरिए हाई-रिस्क निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड्स में निवेश को सरल और सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।
फास्ट-ट्रैक राइट्स इश्यू प्रक्रिया से कंपनियों को अधिकार इश्यू जारी करने में लगने वाला समय कम होगा, जिससे बाजार में तेजी से पूंजी जुटाई जा सकेगी।
SEBI का प्रस्ताव है कि कंपनियों को अब राइट्स इश्यू के लिए केवल महत्वपूर्ण विवरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी, जिससे प्रक्रिया सरल होगी।
रिसर्च एनालिस्ट और निवेश सलाहकारों के लिए सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए स्नातक डिग्री को पर्याप्त योग्यता के रूप में मान्यता दी जा सकती है।
निवेश सलाहकारों के लिए न्यूनतम नेट वर्थ की शर्त समाप्त करने के साथ, अब ग्राहक संख्या और आय के आधार पर जमा राशि तय की जाएगी।
इनसाइडर ट्रेडिंग पर SEBI के नए नियम 'कनेक्टेड पर्सन' की परिभाषा को और विस्तारित करेंगे, ताकि शेयर बाजार में अनियमितताओं को रोका जा सके।
इनसाइडर ट्रेडिंग के नए नियमों में 'रिलेटिव' शब्द को आयकर अधिनियम के अनुरूप शामिल किया जाएगा, जिससे नियमों का दायरा बढ़ेगा।
मर्चेंट बैंकरों के लिए SEBI ने एक नई वर्गीकरण प्रणाली का प्रस्ताव दिया है, जिसमें कैटेगरी 1 और 2 के बैंकरों के लिए अलग-अलग नेट वर्थ शर्तें होंगी।
कैटेगरी 1 मर्चेंट बैंकरों को सभी प्रकार की वित्तीय गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति होगी, जबकि कैटेगरी 2 को सीमित जिम्मेदारियों के साथ रखा जाएगा।
मर्चेंट बैंकरों के पास नए नेट वर्थ नियमों को अपनाने के लिए दो साल का समय होगा, ताकि वे इन मानकों को धीरे-धीरे पूरा कर सकें।
SEBI इन सभी सुधारों के जरिए निवेश बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना और निवेशकों के लिए एक सुरक्षित माहौल तैयार करना चाहता है।